IPC Section 313 in Hindi – आईपीसी धारा 313 क्या है सजा & जमानत

दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारतीय दंड संहिता की धारा 313 क्या है (What is IPC section 313 in Hindi), कैसे इसमें अपराध होता है, क्या सजा सुनाई जाती है, जमानत होती हैं या नहीं, (How is punishment and bail in IPC section 313 in Hindi) वकील की ज़रूरत लगती है या नहीं, भारतीय दंड संहिता की धारा 313 क्या कहती है (What does IPC section 313 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से जानेंगे।

यह महिलाओं के लिए बहुत ही जरूरी है, अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को उसके अनुमति के बगैर उसका गर्भपात करवा देता है तब महिला किस तरह से अपने हक में उस व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही कर सकती है, इसके बारे में जानना समझना महिलाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है, इस धारा में मैं आपको इसी के बारे में पूर्णत: अच्छे तथा सरल भाषा में बताऊंगी।

इस धारा को जानने के बाद हम सिर्फ महिलाओं की ही नहीं बल्कि घर की महिला समाज की महिलाओं तथा अपने मौलिक अधिकारों को भी बचा सकते हैं तथा लोग गलत काम करने से बच भी सकते हैं। आईपीसी 313 में क्या प्रावधान है? यह किस तरह का अपराध है इसके तहत कितनी सजा मिलती है? आईपीसी की धारा 313 जमानती है या नहीं है।

IPC Section 313 in Hindi

अगर आप अच्छे समाज में रहते हैं तथा महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार अक्सर होता है तो यह जानकर आपको बहुत ही लाभ होगा तथा आप उन महिलाओं को भी इनके बारे में बता पाएंगे तथा समाज का कल्याण होगा तो आईपीसी 313 के बारे में विस्तार से जानेंगे अगर आप भी IPC Section 313 के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को पूरा ध्यान से जरूर पढ़ें।

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आईपीसी धारा 313 क्या है (What is IPC Section 313 in Hindi)

आईपीसी की धारा 313 में यह कहा गया है अगर स्त्री की सहमति के बिना उसका गर्भपात कराया जाता है तो यह अपराध आईपीसी की धारा 313 के अंतर्गत आता है, अगर सरल शब्दों में कहें तो अगर कोई स्त्री गर्व से है अथवा व मां बनने वाली है और उसकी सहमति के बगैर अगर उसका मिसकैरेज यानी गर्भपात पारित करवाया जाता है तो वह स्त्री उस व्यक्ति पर IPC की 313 की धारा लगवा सकती है।

इस धारा के बाद उस व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी तथा दंड स्वरूप जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है। अगर कोई महिला अपनी मर्जी से गर्भपात यानी मिसकैरेज करवाना चाहती है तो उसके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता परंतु अगर उसके साथ जबरदस्ती यानी बिना सहमति के करवाया जाता है तो उस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दायर अवश्य किया जाएगा।

यह एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है पर यह सच है कि हमारे देश के बहुत से लोगों अभी भी बेटियों का पैदा होने नहीं देते है गांव और कई घरों में ऐसी समस्या देखी जा रही है इसी कारण हमारे देश के कई राज्यों में लिंग अनुपात बहुत ज्यादा है। मान लीजिए अगर किसी घर में उसके बहू गर्भवती है और उसके घर वाले उसके साथ जबरदस्ती लिंग जांच करवाते हैं।

अगर वह लड़की निकलती है और उसका जबर्दस्ती गर्भपात करा देते हैं तो बहू अपने ससुराल वाले और घरवालों पर आईपीसी की धारा 313 के तहत मुकदमा चला सकती हैं और साथ ही साथ हमारे देश में लिंग जांच भी अपराध है इसके तहत भी उनके ऊपर मुकदमा चला सकती है।

अगर आपके आस पास ऐसी कोई घटना होती है और आप समाज के एक अच्छे नागरिक हैं और आप इस चीज से उस स्त्री को बचाना चाहते हैं तो आप उनके घर वालों के खिलाफ मुकदमा कर सकते हैं उसके घरवालों के ऊपर भ्रूण हत्या का भी मुकदमा चलाया जाएगा।

गर्भपात समाज का सबसे बड़ा पाप है अगर कोई व्यक्ति इसे करता है तो उस व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए। अगर मान लीजिए कोई व्यक्ति किसी लड़की के साथ लिव-इन में है और वह लड़की गर्भवती हो जाती है और वह लड़की उस बच्चे को जन्म देना चाहती है पर वह व्यक्ति अभी उस बच्चे को जन्म देना नहीं चाहता और जबरदस्ती उसका गर्भपात करा देता है।

तो उस व्यक्ति पर धारा 313 के तहत मुकदमा किया जाएगा और उस व्यक्ति को 10 वर्ष की सजा या तो फिर आजीवन कारावास भी हो सकता है यह सजा परिस्थिति और अपराध को देखते हुए दिया जाता है 10 साल की सजा तो दी ही जा सकती है अगर उसका अपराधी से भी थोड़ा बड़ा है तो उसे आजीवन कारावास भी तो हो सकता है इसीलिए आप इन अपराध को करे भी ना और किसी को करने भी ना दें।

आईपीसी धारा 395 में सजा का प्रावधान (Punishment in IPC Section 313 in Hindi)

अगर किसी व्यक्ति के ऊपर आईपीसी 313 की धारा लगाई जाती है तो उसे 10 वर्ष कारावास या आजीवन कारावास या दंड स्वरूप जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है।

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क्या आईपीसी की धारा 313 जमानती है?

अगर किसी व्यक्ति पर आईपीसी की धारा 313 लगाई जाती है तो वह कोई छोटा – मोटा अपराध नहीं माना जाता है , अगर न्यायालय में उसका जुर्म साबित हो जाता है , तब उस व्यक्ति के पास कोई दूसरा मौका नहीं होगा; खुद को सही साबित करने का।

अगर सरल शब्दों में कहें तो आईपीसी की धारा 313 गैर जमानती है इसमें सजा हो जाने के बाद जमानत मिलना बहुत ही मुश्किल अथवा ना के बराबर है। यह एक प्रकार का संज्ञेय श्रेणी का अपराध है।

IPC 313 धारा से कैसे बच सकते हैं?

IPC Section 313 से बचने हेतु सबसे पहले तो यही प्रयास करना होगा कि इस संगीन जुर्म में हम फंसे ही ना किंतु अगर आपको फिर भी कोई झूठे इल्जाम में फसाया जाता है तो आप अपनी आसपास के अच्छे वकील से संपर्क कर अपने पक्ष में बात कोर्ट के सामने पेश कर सकते हैं,

वकील को सारी बातें बताएं ताकि वकील आपकी बातों और आपकी कहानियों के जरिए जज के सामने सारी बाते रख सके तभी जाकर आपको इस अपराध से बरी किया जाएगा, अगर आपके पास सबूत पर्याप्त नहीं होंगे तो आप अपराध से बरी नहीं हो पाएंगे।

IPC 313 की धारा के तहत मुकदमा कैसे?

अगर आपके साथ या आपके परिवार में किसी के साथ ऐसा कुछ होता है तो आप डायरेक्ट पुलिस थाने में जाकर उस व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 313 के तहत मुकदमा कर सकते हैं पुलिस उसके बाद इस अपराध को 313 के तहत दर्ज करती है या फिर आप कोर्ट में जाकर डायरेक्ट इसके प्रति अर्जी कर सकते हैं।

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Conclusion

आपको आज भारतीय दंड संहिता आईपीसी की धारा 313 के बारे में जानकारी उन्नता समझ में आ गई होगी इसमें क्या अपराध बनते हैं (What is IPC section 313 in Hindi) कैसे इस धारा को लागू किया जाएगा इस धारा को पारित करने पर क्या सजा होगी इन सब के बारे में विस्तार से हमने इस आर्टिकल में उल्लेख किया है साथ में जमानत के क्या प्रावधान होंगे।

यदि फिर भी इस धारा से संबंधित आपके मन में कोई भी प्रश्न उठता है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट कर कर अपनी शंका को दूर कर सकते हैं तथा अगर आपको अन्य कोई भी जानकारी प्राप्त करनी हो तो आप हमारे कमेंट बॉक्स के माध्यम से हमें प्रश्न कर सकते हैं तथा हमें सुझाव भी भेज सकते हैं।

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