IPC Section 389 in Hindi – आईपीसी की धारा 389 क्या है | सजा | जमानत

आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारतीय दंड संहिता की धारा 389 क्या हैं (what is IPC section 389 in Hindi), आईपीसी की धारा 389 में कैसे अपराध होता है, कितनी सजा होती है, (Punishment and Bail in IPC Section 389) यह अपराध जमानती है या नहीं है और अगर जमानती है तो जमानत कैसे होती है, एक वकील की जरूरत कब लगती है और इस अपराध को करने से कैसे बचा जा सकता है। यह आईपीसी की धारा 389 क्या कहती है (what does IPC section 389 says in Hindi), इस धारा से जुड़ी सारी जानकारी आपको बताने की कोशिश करेंगे।

आजकल ऐसा हो गया है कि यदि कोई पैसे वाला कोई अपराध करता है तो उसे कुछ नहीं कहा जाता और जो गरीब होता है जिसके पास कुछ नहीं होता उसे सजा दी जाती है। कई बार तो ऐसा होता है कि यदि कोई बड़ा आदमी कोई अपराध करता है तो वह अपना इल्जाम किसी गरीब व्यक्ति पर लगा देता है उसे धमकाकर कि यदि उसने ऐसा नहीं किया तो वह उसे मार देगा या उसके परिवार को नुकसान पहुंचाएगा। ऐसे में उस गरीब व्यक्ति को मजबूर होकर अपने ऊपर इल्जाम लेना पड़ता है और जो अपराध किया ही नहीं है उसकी सजा भी भुगतनी पड़ती है।

IPC Section 389 in Hindi

तो आज हम आपको ऐसे ही एक धारा के बारे में बताएंगे की जबरन वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का आरोप लगाने के भय में डालने पर क्या होता है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 389 (IPC section 389 in Hindi) से जुड़ी सारी जानकारी हम आपको इस आर्टिकल में बहुत विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अंत तक पढ़ना है।

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आईपीसी की धारा 389 क्या है (What is IPC Section 389 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 389 के अनुसार जो भी कोई व्यक्ति जबरन वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति को स्वयं उसके खिलाफ या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ ऐसे अपराध (जिसकी सज़ा मॄत्यु दण्ड या आजीवन कारावास, या दस वर्ष तक कारावास है) का आरोप लगाने का डर दिखायेगा या डर दिखाने का प्रयास करेगा कि उसने ऐसा अपराध किया है या करने का प्रयास किया है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा। यदि वह अपराध ऐसा हो जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 377 के अनुसार दण्डनीय है, तो उसे आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा ।

 Example:  रमेश की दुश्मनी उसके पड़ोस के राजू से रहती है तो इसके चलते रमेश राजू की बेटी को किडनैप कर लेता है और बाद में राजू को फोन कर 1000000 रुपए मांगता है और कहता है कि यदि वह पैसे नहीं भेजेगा तो वह उसकी बेटी को मार देगा या उसके साथ कुछ बुरा कर देगा। ऐसे में राजू काफी डर जाता है और अपनी बेटी की चिंता करने लग जाता है तो वह पुलिस के पास जाता है और पुलिस को सारे मामला बताता है तो फिर पुलिस उसे एक सुझाव देती है कि वह पैसा लेकर जाए और पीछे से पुलिस आकर उस गिरफ्तार कर लेगी।

जैसा जैसा पुलिस बताती है वैसा राजू करता है और सब कुछ योजना के अनुसार होता है राजू वहां पैसा लेकर जाता है और रमेश को दे देता है और अपनी बेटी को बचा लेता है। मगर जैसे ही रमेश वहां से जाने वाला होता है तभी पुलिस आ जाती है और रमेश को पकड़ लेती हैं और रमेश को गिरफ्तार कर जब न्यायालय में पेश किया जाता है तो उसके खिलाफ धारा 389 लगाकर उस धारा के अनुसार दंडित किया जाता है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 389 में सजा का प्रावधान (Punishment in IPC section 389 in Hindi)

आईपीसी की धारा 389 (IPC Section 389) के अनुसार किसी व्यक्ति को अपराध (जिसकी सज़ा मॄत्यु दण्ड या आजीवन कारावास, या दस वर्ष तक कारावास है) का आरोप लगाने का भय दिखाने वाले व्यक्ति को 10 वर्ष की कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दण्डित किया जाता है। यह एक संज्ञेय अपराध है और समझौता करने योग्य नहीं है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

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भारतीय दंड संहिता की धारा 389 में जमानत का प्रावधान (Bail in IPC section 389 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 389 के अनुसार किसी व्यक्ति को अपराध (जिसकी सज़ा मॄत्यु दण्ड या आजीवन कारावास, या दस वर्ष तक कारावास है) का आरोप लगाने का भय दिखाने वाले व्यक्ति को 10 वर्ष की कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दण्डित किया जाता है। यह एक  जमानती अपराध है, इस अपराध में किसी भी अपराधी को आसानी से जमानत मिल जाती है।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं होता है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा काफी विचारणीय होता है। ऐसे में अपराधी अपनी जमानत की याचिका उच्च न्यायालय में पेश करता है तो उसकी जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया जाता है और जमानत मंजूर कर दी जाती हैं।

वकील की जरूरत कब लगती है।

भारतीय दंड संहिता के अनुसार यह एक जमानती अपराध है मगर किसी भी अपराधी को जमानत लेने के लिए एक वकील की जरूरत तो लगती ही है जो उसे जमानत दिलवा सकें। ऐसे अपराधों में आरोपी को निर्दोष साबित करना काफी मुश्किल होता है तो उसे सिर्फ एक वकील ही बचा सकता है जो उसे निर्दोष साबित कर जमानत दिलवा सके। किसी भी केस को सुलझाने के लिए एक ऐसे वकील को नियुक्त करना चाहिए जो अपने क्षेत्र में निपुण हो और अपराधी को निर्दोष साबित कर उसे जमानत दिलवा ने में मददगार साबित हो सके।

 Note:  IPC Section 389 से बचने के लिए आपको कभी भी किसी से जबरन काम नहीं करवाना है यानी की उसपे गलत आरोप लगा कर उसे भय नहीं दिखाना है तभी आप इस धरा से बच सकते हैं।

FAQ’s 

Q1. भारतीय दंड संहिता की धारा 389 के अनुसार क्या अपराध है?

Ans. किसी व्यक्ति को अपराध (जिसकी सज़ा मॄत्यु दण्ड या आजीवन कारावास, या दस वर्ष तक कारावास है) का आरोप लगाने का भय दिखाना।

Q2. भारतीय दंड संहिता की धारा 389 के मामले की सजा क्या है?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 389 के मामले में दस वृष की कारावास और आर्थिक जुर्माना दोनो का प्रावधान है।

Q3. भारतीय दंड संहिता की धारा 389 जमानती अपराध है या गैर – जमानती अपराध?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 389 एक जमानती अपराध है।

Q4. भारतीय दंड संहिता की धारा 379 संज्ञेय अपराध है या गैर – संज्ञेय अपराध?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 379 संज्ञेय अपराध है।

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Conclusion

इस आर्टिकल में हमने बताया कि जबरन वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का आरोप लगाने के भय में डालने पर क्या होता है। कितनी सजा होती है, जमानत कैसे मंजूर की जाती है और कैसे वकील मददगार साबित हो सकता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 389 (IPC section 389 in Hindi) से जुड़ी सारी जानकारी हमने आपको बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

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