IPC 309 in Hindi – आईपीसी की धारा 309 क्या है सजा & जमानत

दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आईपीसी धारा 309 क्या है। (What is IPC Section 309 in Hindi), आईपीसी धारा 309 में कैसे सजा होती है, आईपीसी धारा 309 कैसे इसमें जमानत होती है। (How is punishment and bail in IPC section 309 in Hindi) यह धारा क्या कहती है। (What does IPC section 309 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से जानेंगे बस आप आर्टिकल लास्ट तक पढ़ते रहना।

दोस्तों जैसा कि आप सभी जानते है कि आज कल हमारे देश भारत में और सिर्फ हमारे ही देश में नहीं बहुत से देशों में आत्महत्या के cases में बहुत ज्यादा वृद्धि हो रही है। मतलब कि दिन पर दिन आत्महत्या के केसेस बढ़ते ही जा रहे है। कोई Depression में आकर Suicide कर रहा है तो कोई किसी चीज में फ़ैल हो जाने पर, कोई घर से तंग हो जाने के कारन ऐसा कर रहा है।

तो किसी और कि कुछ अलग ही कारण है। कहने का ये मतलब है कि SUICIDE केसेस बढ़ते ही जा रहे है। मगर दोस्तों SUICIDE किसी भी समस्या का हल हो ही नहीं सकता। इस दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसका हल न निकला जा सके तो आत्महत्या तो बहुत ही फालतू बात है जो किसी को नहीं करना चाहिए साथ ही साथ अगर किसी के मन में भी ऐसा कुछ आता है।

IPC 309 in Hindi

तो उसे समझाना चाहिए। दोस्तों ऐसा करना भी अपराध माना गया है जिसके लिए भारतीय दंड संहिता कि धारा IPC 309 के अंतर्गत सजा सुनाई जाती है। आज की ये जानकारी बहुत इम्पोर्टेन्ट है, इसलिए आप ये आर्टिकल को पूरा End तक पढ़ें ताकि आपको ये समझ आ सके।

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आईपीसी की धारा 309 क्या है (What is IPC Section 309 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के अनुसार, जो भी कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा, और उस अपराध के करने के लिए कोई कार्य करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए सादा कारावास से जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दण्ड, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

दोस्तों जैसा कि हमने ऊपर में कहा के आत्महत्या कोई समाधान नहीं है मगर ऐसा करने वाले को सरकार अपराध मानते हुए उसे सजा देती है। suicide करने कि आज़ादी नहीं है, और ऐसा करने वालो को कानून सजा देगा।

आईपीसी धारा 309 के तहत मिलने वाली सजा (Punishment in IPC Section 309 in Hindi)

जो भी कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा, और उस अपराध के करने के लिए-

  • एक वर्ष सादा कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों।
  • यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
  • यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

 Note:  IPC की इस धारा 309 के अंतर्गत ये बताया गया है, जो भी कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा, और उस अपराध के करने के लिए कोई कार्य करेगा, तो उसे एक अवधि तक के लिए सजा सुनाई जाएगी।

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आईपीसी धारा 309 में जमानत का प्रावधान (Bail in IPC Section 309 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 127 के अनुसार यदि कोई वेयक्ति अपने जान को ख़तम करना चाहता है यानी की Suicide करना चाहता है तो ऐसे व्यक्ति को 1 वर्ष का कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दण्डित किया जाता है। और यह अपराध एक जमानती माना गया है जिसके चलते किसी भी आरोपी को ज़मानत बहुत जलधि मिल जाती है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति उच्च न्यायालय में याचिका दायर करता है तो उसकी याचिका को सुविकार कर दिया जाता है।

 Note:  इस अपराध से बचने का तरीका यह है कि कोई भी वेयक्ति अपनी खुद की जान कभी न ले यानी आत्महत्या कभी न करे क्युकी अगर आप ऐसा करते हैं तो नुक़सान आपका ही होगा इसीलिए एशा कदम आप कभी न उठाये।

एक वकील की ज़रूरत क्यों लगती हैं।

भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के अनुसार यह एक जमानती अपराध है जिसके चलते आरोपी को ज़मानत जलधि मिल जाती है तो ऐसे में जमानत लेने के लिए आपको किसी एक वकील hire करना होता है। क्यूंकि आपको जमानत एक वकील के द्वारा ही मिलता है

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Conclusion

आशा है की आपको आईपीसी धारा 309  क्या है? इससे सम्बंधित बहुत सी जानकारी आपको हुई होगी और साथ ही IPC की धारा 309 क्या कहती है? (What does section IPC 309 says in Hindi). इसकी जानकारी भी आपको मिल गयी होगी। क्यूंकि मैंने आपको हर चीज बताया है जिससे आपको हर चीज अच्छे से समझ में आया होगा।

तो अगर आपको ये ARTICLE पसंद आया हो तो आप अपने दोस्तों के साथ जरूर इसे शेयर करें ताकि आपके दोस्त भी हमारे भारतीय दंड संहिता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

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