IPC Section 101 in Hindi – आईपीसी धारा 101 क्या है पूरी जानकारी

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 101 क्या है। (What is IPC section 101 in Hindi), आईपीसी धारा 101 में कैसे अपराध होता है, कितनी सजा सुनाई जाती है, कैसे जमानत होती है, जमानत होती है या नहीं, वकील की ज़रूरत कब लगती है, इस अपराध को करने से कैसे बचा जा सकता है। यह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 101 क्या कहती है (What does IPC section 101 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से समझाने की कोशिश करेंगे।

आपराधिक मामलों में प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार एक अहम एवं जरुरी अधिकार है। यह अधिकार व्यक्ति विशेष को स्वयं को या अपनी किसी संपत्ति के विरुद्ध हो रहे या हो सकने वाले अपराध को रोकने में मदद करता है। यह अधिकार, स्व संरक्षण (self-preservation) के सिद्धांत पर आधारित है। खुद की रक्षा करना एक कानूनी अधिकार है जिसका उपयोग हम तब कर सकतें है जब हमारे साथ कुछ गलत होरा हो। कानून के अनुसार पुलिस हर जगह मौजूद नहीं रह सकती जिसके चलते यह अधिकार दिया गया है भारत के सभी नागरिकों को ताकी वह खुद की रक्षा कर सके।

IPC Section 101 in Hindi

तो आज हम ऐसे ही एक धारा के बारे में जानेंगे और देखेंगे की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार क्या है। यह सभी बातें हम भारतीय दण्ड संहिता की धारा 101 में बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अन्त तक पढ़ना है।

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आईपीसी धारा 101 क्या है (What is IPC Section 101 in Hindi)

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 101 के अनुसार यदि अपराध पूर्वगामी अंतिम धारा में प्रगणित भांतियों में से किसी भांति का नहीं है, तो शरीर की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार हमलावर की मॄत्यु स्वेच्छया कारित करने तक का नहीं होता, किंतु इस अधिकार का विस्तार धारा 99 में वर्णित निर्बन्धनों के अध्यधीन हमलावर की मॄत्यु से भिन्न कोई क्षति स्वेच्छया कारित करने तक का होता है।

आसान भाषा में समझाने की कोशिश करें तो इस धारा के मुताबिक शरीर पर होने वाले हमले से बचाव के लिए प्राइवेट प्रतिरक्षा का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालाँकि इसके अंतर्गत किसी हमलावर की मृत्यु कारित नहीं की जा सकती है। यह उन मामलों से सम्बंधित है जो मामले धारा 99 के अंतर्गत नहीं आते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी हमलावर की मृत्यु केवल धारा 99 में बताएं मामलों के अंतर्गत कारित की जा सकती है, अन्य मामलों में मृत्यु करने को छोड़ कर कोई भी चोट पहुंचाई जा सकती है।

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इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि कैसे हम खुद की रक्षा कर सकतें है मगर किसी की मौत किए बिना, अगर किसी कि मौत हो जाती है तो वह अपराध बन जाता है। यह सभी बातें हमने आपको भारतीय दण्ड संहिता की धारा 101 (IPC section 101 in Hindi) में बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

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