IPC section 113 in Hindi – आईपीसी धारा 113 क्या है पूरी जानकारी

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 113 क्या है (What is IPC section 113 in Hindi), आईपीसी धारा 113 में कैसे अपराध होता है, कितनी सजा सुनाई जाती है, जमानत कैसे होती है, जमानत होती है या नहीं, वकील की ज़रूरत कब लगती है, इस अपराध को करने से कैसे बचा जा सकता है। यह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 113 क्या कहती है (What does IPC section in Hindi), सब कुछ विस्तार से समझाने की कोशिश करेंगे।

अक्सर हमारे समाज में ऐसे बहुत से लोग होते है जो किसी भी तरक्की नहीं देख सकते तो वो उस व्यक्ति का नुकसान करने का सोचते हैं और नुकसान करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को उकसाते है जो उस तरक्की करने वाले से थोड़ी बहुत ईर्ष्या रखता हो। ईर्ष्या रखने वाला पहले ही तरक्की करने वाले के बारे में गलत सोचता है ऐसे में उसे कोई ओर उकसा देता है तो उसका हौसला ओर बड़ जाता है और वह कुछ गलत अपराध करने का सोचने लग जाता है।

IPC section 113 in Hindi

तो आज हम ऐसे ही एक धारा के बारे में जानेंगे और देखेंगे कि दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो तब क्या होता है। यह सभी बातें हम भारतीय दण्ड संहिता की धारा 113 (IPC section 113 in Hindi) में बहुत ही विस्तार से समझाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अन्त तक पढ़ना है।

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आईपीसी धारा 113 क्या है। (What is IPC Section 113 in Hindi) 

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 113 के अनुसार किसी भी कार्य का दुष्प्रेरण दुष्प्रेरक द्वारा किसी विशिष्ट प्रभाव को करने के इरादे से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन है। वह कार्य दुष्प्रेरक के द्वारा आशयित प्रभाव से अलग प्रभाव कारित करता है तब दुष्प्ररेक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया हो परन्तु यह तब जब कि वह यह जानता था कि दुष्प्रेरित कार्य से वह प्रभाव कारित होना निश्चित है।

Illustration: उकसाता है को का कुछ नुकसान करने के लिए, उकसाहट से को काफ़ी नुकसान पहुँचा देता है। ज्यादा गंभीर चोट लगने के कारण की मौत हो जाती है। इस अपराध में यह जानता था की उसकी उकसाहट से की मौत होना निश्चित हैं मगर उसने फिर भी उकसाया। तो यहां हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है। 

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इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो तब क्या होता है। यह सभी बातें हमने आपको भारतीय दण्ड संहिता की धारा 113 (IPC section 113 in Hindi) में बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

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