IPC Section 111 in Hindi – आईपीसी धारा 111 क्या है पूरी जानकारी

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 111 क्या है (What is IPC section 111 in Hindi), आईपीसी धारा 111 में कैसे अपराध होता है, कितनी सजा सुनाई जाती है, जमानत कैसे होती है, जमानत होती है या नहीं, वकील की ज़रूरत कब लगती है, इस अपराध को करने से कैसे बचा जा सकता है। यह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 111 क्या कहती है (What does IPC section 111 in Hindi), सब कुछ विस्तार से समझाने की कोशिश करेंगे।

पहले के लोग खुद के काम से मतलब रखते थे और यदि किसी के साथ कुछ बुरा होता था तो सांत्वना देते हैं और हौसला बड़ाते थे और यदि किसी के साथ कुछ अच्छा होता था तो उसकी खुशी में शामिल होते थे। मगर आजकल लोग यदि किसी के साथ कुछ बुरा होता है तो उसे सांत्वना देने के बजाए उसे कुछ गलत करने को उकसाते है और यदि किसी के साथ कुछ अच्छा होता है तो उसकी बुराई करते है और किसी ओर को उसके खिलाफ कुछ गलत करने को उकसाने का काम करते हैं।

IPC Section 111 in Hindi

तो आज हम ऐसे ही एक धारा के बारे में जानेंगे और देखेंगे कि दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे अलग कार्य करने पर क्या होता है। यह सभी बातें हम भारतीय दण्ड संहिता की धारा 111 (IPC section 111 in Hindi) में समझाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अन्त तक पढ़ना है।

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आईपीसी धारा 111 क्या है (What is IPC Section 111 in Hindi)

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 111 के अनुसार जब कि किसी एक कार्य का दुष्प्रेरण किया जाता है, और कोई भिन्न कार्य किया जाता है, तब दुष्प्रेरक उस किए गए कार्य के लिए उसी प्रकार से और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने सीधे उसी कार्य का दुष्प्रेरण किया हो। 

मगर यह तब जब किया गया कार्य दुष्प्रेरण का परिणाम था और उस उकसाहट के असर के अनुसार या उस सहायता से या उस षडयंत्र के अनुसरण में किया गया था जिससे वह दुष्प्रेरण गठित होता है। 

Illustration:-  ख को य का घर जलाने के लिए क उकसाता है। ख उस घर को आग लगा देता है और उसी समय वहाँ अन्य सामान की चोरी करता है। क हालाँकि घर को जलाने के दुष्प्रेरण का दोषी है। किन्तु चोरी के दुष्प्रेरण का दोषी नहीं है;, क्योंकि वह चोरी एक अलग कार्य थी और उस घर के जलाने का परिणाम नहीं थी।

आसान भाषा में समझाने की कोशिश करें तो यदि कोई व्यक्ति किसी को उकसा कर कुछ अपराध करने को कहता है। और अपराध करने वाला व्यक्ति उकसाने वाले की बातों में आकर अपराध कर देता है मगर उस अपराध के अलावा भी कुछ ओर अपराध कर देता है तब धारा 111 लागू होती है।

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Conclusion

इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि दुष्रेरण का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे अलग कार्य करने पर क्या होता है।   तब क्या होता है। यह सभी बातें हमने आपको भारतीय दण्ड संहिता की धारा 111 (IPC section 111 in Hindi) में बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

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