CRPC 482 in Hindi – सीआरपीसी की धारा 482 क्या है पूरी जानकारी

दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि सीआरपीसी की धारा 482 क्या है। (What is CRPC Section 482 in Hindi), सीआरपीसी की धारा 482 कब नहीं लागू होगी और दंड प्रक्रिया सहिता (CrPC) की धारा 482 के लिए किस तरह अप्लाई की जाती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा क्या कहती है। (What does CRPC Section 482 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से जानेंगे बस आप आर्टिकल लास्ट तक पढ़ते रहना।

दोस्तों कई बार ऐसा होता है कि हम पुलिस में Complaint लिखवा देते है और मामला कोर्ट में भी चला जाता है पर ऐसा बहुत बार होता है कि वो Case Pending हो जाता है। दोस्तों एक Survey के अनुसार 2020 तक भारत में। 3.65 करोड़ Case पेंडिंग है, अब इस Pending केस के पीछे भी बहुत से कारण हो सकते है।

दोस्तों ऐसी स्थिति में भी न्याय व्यवस्था में एक धरा का ज़िक्र हमे मिलता है जिसकी सहायता से हम उस Pending केस के प्रोसेस को उसके कंक्लूशन कि मांग कर सकते है। तो दोस्तों आज हम जानेंगे CRPC कि धारा 482 के बारे मे।

CRPC 482 in Hindi

दोस्तों कई बार ऐसा भी होता है कि किसी व्यक्ति ने किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ झूठी FIR लिखवा दी हो तब उस परिस्थिति में वो व्यक्ति क्या करेगा ? क्या आप इसके बारे में जानते है ? अगर नहीं तो आज के हमारे इस आर्टिकल को आप पूरा एन्ड तक पढ़ें ताकि आपको CRPC कि धारा 482 के बारे में बहुत ही अच्छी जानकारी मिल जाये।

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सीआरपीसी धारा 482 क्या है (What is CRPC 482 in Hindi)

दोस्तों हमेशा कि तरह हम इसके दिए हुए परिभाषा से शुरुआत करेंगे ताकि आगे उसको सरल करके अच्छे से समझ सके। भारतीय दंड संहिता कि धारा CRPC 482 के अनुसारदंड प्रक्रिया संहिता 1973 (CRPC) के अंतर्गत धारा 482 के अधीन उच्च न्यायालय को अंतर्निहित शक्ति (Inherent Power) प्रदान की गई है।

इस धारा के अधीन उच्च न्यायालय को एक विशेष शक्ति दी गई है। यह शक्ति दिए जाने का उद्देश्य न्यायालय की कार्यवाही को दुरुपयोग से बचाना है तथा न्याय के उद्देश्यों को बनाए रखना है।अब इसे थोड़ा आसान शब्दों में समझते हैदंड प्रक्रिया संहिता 1973 (CRPC) के अंतर्गत धारा 482 के अधीन उच्च न्यायालय को अंतर्निहित शक्ति (Inherent Power) प्रदान की गई है।

इस धारा के अधीन उच्च न्यायालय को एक विशेष शक्ति दी गई है। यह शक्ति दिए जाने का उद्देश्य न्यायालय की कार्यवाही को दुरुपयोग से बचाना है तथा न्याय के उद्देश्यों को बनाए रखना है।

कुछ Important Points Examples के साथ

 Example No. 1  मान लो कोर्ट में आपका कोई मामला है जो की पेंडिंग है, जिसका कोई भी Conclusion नहीं हो रहा है। काफी समय हो गया है उस केस को कोर्ट में गए और सिर्फ वो केस डिले हो रहा है। लेकिन अब आप चाहते हो की उस केस का आगे Process हो जिससे कुछ निष्कर्ष निकले,

तब इस परिस्थिति में आप भारतीय दंड संहिता की धारा CRPC 482 का उपयोग कर सकते है। अब ऐसा करने के लिए आपको सबसे पहले किसी अच्छे वकील की सहायता लेनी पड़ेगी और उस वकील की सहायता से आगे की प्रोसेडूरे आगे बढ़ेगा। इसके लिए भी हम आपको बताएंगे की वकील किस तरह से आपकी सहायता करेगा। 

 Example No. 2  अब हम ये देखते है की कैसे CRPC 482 के जरिये हम झूठी FIR के विरुद्ध एक्शन ले सकते है। मान लो की आपके खिलाफ किसी ने झूठी FIR लिखवा दी और अब आपको डर है की पुलिस आपको अरेस्ट करेगी तब इसी सीआरपीसी 482 के जरिये आप इसके खिलाफ स्ट्रिक्ट एक्शन ले सकते हो

और इसे निरस्त करवा सकते हो। वकील इसके खिलाफ एक एप्लीकेशन लगवा कर निष्पक्ष जांच की मांग कर सकता है। मगर सबसे बड़ी बात तो ये है की पहले एप्लीकेशन लगाने से Arrest Warrant रद्द हो जाता है, अगर झोठी FIR लिखवाई गयी है तो। 

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 Example No. 3  भारतीय दंड संहिता की धारा CRPC 482 के तहत एक और सहायता आपको मिल सकती है जो की ये है- मानलो यदि किसी मामले के अंदर आप पर केस चल रहा है और आप Compromise करना चाहते है मगर कोर्ट ने इसे निरस्त्र कर दिया है तब इस तरह की परिस्थिति में CRPC 482 हाई कोर्ट को Inherant Power देता है तो आपके लिए सहायता जनक होगा।

सीआरपीसी धारा 37 के तहत वकील की जरूरत

दोस्तों CRPC की इस धारा 482 के तहत आपको वकील की बहुत ज़्यादा जरुरत रहेगी क्युकी जैसा हमने ऊपर जो 3 Examples देखे है उसके लिए वकील ही आपके लिए आवेदन लगाएगा।  इसके लिए आपको अपने वकील को पूरा डिटेल उसे अच्छे से बताना पड़ेगा।

फिर वकील की सहायता से आपको हाई कोर्ट में उस एप्लीकेशन को अप्लाई करना पड़ेगा फिर जो हाई कोर्ट के निचे का कोर्ट है जिसके अंदर आपका केस चल रहा है उस कोर्ट को हाई कोर्ट एक नोटिस देगा फिर उस कोर्ट का जज जांच कर आगे का कार्य करेगा। तो इसके लिए बेशक आपको वकील की जरुरत पड़ेगी।

 NOTE:  दोस्तों इस धारा के तहत, उच्च न्यायालय को अंतर्निहित शक्ति (Inherent Power) प्रदान की गई है। इस धारा के अधीन उच्च न्यायालय को एक विशेष शक्ति दी गई है। यह शक्ति दिए जाने का उद्देश्य न्यायालय की कार्यवाही को दुरुपयोग से बचाना है तथा न्याय के उद्देश्यों को बनाए रखना है।

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आशा है की आपको सीआरपीसी की धारा 482 क्या है। (What is CRPC Section 482 in Hindi) इससे सम्बंधित बहुत सी जानकारी आपको हुई होगी और साथ ही CRPC की धारा 482 क्या कहती है? (What does section CRPC 482 says in Hindi). इसकी जानकारी भी आपको मिल गयी होगी। तो अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया हो तो आप अपने दोस्तों के साथ जरूर इसे शेयर करें ताकि आपके दोस्त भी हमारे भारतीय दंड संहिता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

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