CRPC Section 324  in Hindi – सीआरपीसी धारा 324 क्या है पुरी जानकारी

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि दंड प्रक्रिया संहिता कि धारा 324 क्या है (What is CrPC section 324 in Hindi), इस धारा में किस तरह न्यायालय आदेश जारी करती है, किन मामलों में धारा 324 लगाई जाती है, क्यों धारा 324 लगाई जाती है। सीआरपीसी कि धारा 324 क्या कहती है (What does CrPC section 324 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से जानेंगे बस आप आर्टिकल लास्ट तक पढ़ते रहना।

ऐसे बहुत से मामले होते है जिनमें पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करती है, पुलिस के अनुसार ऐसे मामले रोज़ होते है और समझौता भी हो जाता है तो रिपोर्ट दर्ज करना जरूरी नहीं समझती है। पर यदि कोई व्यक्ति चाहता है कि उसके साथ जो अपराध हुआ है उसकी रिपोर्ट दर्ज हो चाहे अपराध छोटा हो या बड़ा ऐसे में पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करनी ही पड़ती है ओर मामले की जांच करनी ही पड़ती हैं।

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तो आज हम ऐसे ही एक धारा के बारे में जानेंगे और देखेंगे की जिन मामलों में अपिल नहीं होती उन मामलों में न्यायालय क्या आदेश जारी करती है, किस प्रकार के आदेश जारी करती है, सब कुछ इस दंड प्रक्रिया संहिता कि धारा 324 (CrPC section 324 in Hindi) में जानेंगे तो आपको यह आर्टिकल अन्त तक पढ़ना है।

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सीआरपीसी धारा 324 क्या है (What is CRPC Section 324 in Hindi)

दंड प्रक्रिया संहिता कि धारा 324 के अनुसार: छोटे मामलों में अपिल ना होने पर

 1  जब भी कोई व्यक्ति भारतीय दंड संहिता 45 के अध्याय 12 या अध्याय 17 के अन्तर्गत तीन वर्ष या अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध किए जा चुकने पर उन अध्यायों में से किसी के अन्दर तीन वर्ष या अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय किसी अपराध के लिए दोबारा अपराधी है, और उस मजिस्ट्रेट का, जिसके अधीन मामला अटका हुआ है।

समाधान हो जाता है कि यह उपधारणा करने के लिए आधार है कि ऐसे व्यक्ति ने अपराध किया है तो वह उस दशा के सिवाय विचारण के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा या सेशन न्यायालय को सौंपा जाएगा, जब मजिस्ट्रेट मामले का विचारण करने के लिए सक्षम है और उसकी यह राय है कि यदि आरोपी दोषसिद्ध किया गया तो वह स्वयं उसे पर्याप्त दंड का आदेश दे सकता है।

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 Eng:  When any person having been condemned of an offence punishable under Chapter XII or Chapter XVII of the Indian Penal Code 45  with imprisonment for a term of three years or more, is again convicted of any offence punishable under either of those Chapters with imprisonment for a term of three years or more, and the Magistrate before whom the case is pending is satisfied

That there is ground for presuming that such person has committed the offence, he shall be sent for trial to the  Judicial Magistrate or committed to the Court of Session unless the Magistrate is efficient to try the case and is of opinion that he can himself pass an adequate sentence if the accused is convicted.

 2  उपधारा (1) के अन्तर्गत यदि किसी व्यक्ति को विचारण के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजा जाता है या सेशन न्यायालय को सौंपा जाता है तब कोई अन्य व्यक्ति, जो उसी जांच या विचारण में उसके साथ कोई और आरोपी भी है, वैसे ही भेजा जाएगा या सौंपा जाएगा जब तक ऐसे अन्य व्यक्ति को मजिस्ट्रेट धारा 239 या धारा 245 के अधीन दोषी करार न  दे।

 Eng:  When a person is sent for trial to the  Judicial Magistrate or committed to the Court of Session under Sub-Section (1) any other person suspected jointly with him in the same shall be  sent to the Magistrate discharges such other person under section 239 or section 245, as the case may be.

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इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि कैसे कोई आरोपी पहले से दंडित होने के बाद कोई ओर अपराध करता है तब न्यायालय क्या करती है, कैसे उसके अपराध पर विचार किया जाता है, कैसे उच्च मैजिस्ट्रेट को सौंपा जाता है और मामले की जांच की जाती है। यह सभी बातों को हमने बहुत ही आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

दंड प्रक्रिया संहिता कि धारा 324 क्या है (What is CrPC section 324 in Hindi) सीआरपीसी कि धारा 324 क्या कहती है (What does CrPC section 324 says in Hindi) हम उम्मीद करते हैं आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और लाभकारी साबित हुआ होगा अगर आपको पसंद आया है तो अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करें।

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