IPC Section 106 in Hindi – आईपीसी धारा 106 क्या है सजा | जमानत

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आईपीसी धारा 106 क्या है (What is IPC section 106 in Hindi), आईपीसी धारा 106 में कैसे अपराध होता है, कितनी सजा सुनाई जाती है, जमानत कैसे होती है, जमानत होती है या नहीं, वकील की ज़रूरत कब लगती हैं यह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 106 क्या कहती है (What does IPC section 106 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से समझाने की कोशिश करेंगे।

हमारे भारत में रह रहे हर एक व्यक्ति अपनी और अपने परिवार व अपनी संपत्ति की रक्षा करना मौलिक अधिकार होता है, कोई भी व्यक्ति अपनी जान, माल की रक्षा के लिए किसी को रोके, धमकी दे या किसी भी अन्य साधन का उपयोग करके अपनी रक्षा करे, आत्मरक्षा कहलाता है। आत्मरक्षा के अधिकार के अनुसार सामने वाले व्यक्ति को उतनी ही नुकसान पहुंचा सकता हैं, जितना वह आप को पहुंचाना चाहता है। जैसे यदि कोई आप पर डंडे से हमला करता है, तो आप भी आत्मरक्षा में डंडे का इस्तेमाल कर उसपर हमला कर सकतें है। कोई ओर हथियार नहीं इस्तेमाल कर सकते है। उस हमले को अपराध नहीं माना जाएगा बल्कि उसे आत्मरक्षा का अधिकार माना जाएगा।

IPC Section 106 in Hindi

तो आज हम ऐसे ही एक धारा के बारे में जानेंगे और देखेंगे कि यह सभी बातें हम भारतीय दण्ड संहिता की धारा 106 (IPC section 106 in Hindi) में समझाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अन्त तक पढ़ना है।

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आईपीसी धारा 106 क्या है (What is IPC Section 106 in Hindi)

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 106 के अनुसार जिस भी हमले से मॄत्यु की आशंका कारित होती है उसके खिलाफ प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का उपयोग करने में यदि प्रतिरक्षक ऐसी स्थिति में हो कि निर्दोष व्यक्ति की अपहानि की जोखिम के बिना वह उस अधिकार का प्रयोग कार्यसाधक रूप से न कर सकता हो तो उसके प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार वह जोखिम उठाने तक का है।

Illustration क पर एक भीड़ द्वारा आक्रमण किया जाता है, जो उसकी हत्या करने का प्रयत्न करती है। वह उस भीड़ पर गोली चलाए बिना प्राइवेट प्रतिरक्षा के अपने अधिकार का उपयोग नहीं कर सकता और वह भीड़ में शामिल छोटे-छोटे बच्चों की अपहानि करने की जोखिम उठाए बिना गोली नहीं चला सकता। यदि वह इस प्रकार गोली चलाने से उन बच्चों में से किसी भी बच्चे को अपहानि करे तो क कोई अपराध नहीं करता।

 आसान भाषा में  आसान भाषा में समझाने की कोशिश करें तो यदि किसी ऐसे हमले के खिलाफ प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए, जिससे मृत्यु की आशंका उत्पन्न होती है, तो रक्षक इस प्रकार स्थित हो कि वह किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के जोखिम के बिना उस अधिकार का प्रभावी रूप से प्रयोग न कर सके, तो उसके निजी बचाव के अधिकार का विस्तार उस जोखिम तक का है।

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इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है। यह सभी बातें हमने आपको भारतीय दण्ड संहिता की धारा 106 (IPC section 106 in Hindi) में बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

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