IPC 5 in Hindi – आईपीसी धारा 5 क्या है पूरी जानकारी

दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आईपीसी धारा 5 क्या है। (What is IPC Section 5 in Hindi), आईपीसी धारा 5 में कैसे सजा होती है, आईपीसी धारा 5 कैसे इसमें जमानत होती है। (How is punishment and bail in IPC section 5 in Hindi) यह धारा क्या कहती है। (What does IPC section 5 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से जानेंगे बस आप आर्टिकल लास्ट तक पढ़ते रहना।

हमें हमारे देश के Indian Penal Code के हर एक सेक्शन की जानकारी होना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे हमें हमारे देश के कानून की जानकारी होती है जिससे हम अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। क्या हमारे इंडियन पेनल कोड में ऐसा कोई भी कानून है जिसके जरिए हम किसी विशेष प्रकार के कानून या लोकल कानून को चुनौती दे सकते हैं? क्या इंडियन पेनल कोड में ऐसा कोई भी कानून है? जिसके जरिए हम आर्मी ऑफिसर या किसी  सैनिक को सजा दे सकते हैं। जो उसने अपने कार्य के दौरान किया हुआ है।

इन सब चीजों की जानकारी आपको इंडियन पेनल कोड के सेक्शन 5 में मिलेगी। आज इस आर्टिकल में हम आईपीसी पांच के बारे में विस्तार से जानेंगे आखिरकार ipc  5 क्या ह? ipc  5 में कौन से कानून हैं? ipc 5 में क्या प्रावधान प्राप्त कर आते हैं इन सब चीज के बारे में हम इस आर्टिकल में विस्तार से जानेंगे अगर आप भी ipc के सेक्शन 5 के बारे में जानना चाहते हैं

IPC 5 in Hindi

हमारे आर्टिकल को पूरा ध्यान से पढ़ें इसमें आपको इस पैटर्न से संबंधित बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी और यह सारी जानकारी आपको हिंदी में प्राप्त होगी जिससे कि आपको यह समझने में बहुत आसानी होगी।

हमें कानून की हर एक धारा की जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि हम समय आने पर अपना बचाव और अपने मौलिक अधिकारों को बचा सके हम अपने आप को गलत इल्जाम से भी बचा सके इसके लिए हमें अपने कानून की जानकारी होना बहुत जरूरी है इसी घडी में आज हम आईपीसी की धारा पांच के बारे में जानेंगे।

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आईपीसी धारा 5 क्या है (What is IPC Section 5 in Hindi)

अब हम आईपीसी की धारा 5 को हिंदी में बहुत विस्तार से जानेंगे सबसे पहले हम IPC Section 5 kya hai इसके बारे में जानेंगे।

आईपीसी की धारा 5 में ऐसा कानून है जिसके तहत यह कहा गया है कि इंडियन पीनल कोड किसी भी प्रकार की आर्मी एक्ट में दखलअंदाजी नहीं कर सकती है मान लीजिए किसी भी सैनिक या आर्मी पर्सन ने कार्य के दौरान ही सेना को छोड़कर भागने का कार्य किया है या फिर सेना के साथ बेईमानी की है।

तो उस पर आर्मी एक्ट के द्वारा ही मुकदमा होगा और उसके तहत ही उसे सजा मिलेगी इस पर Indian penal Code किसी भी प्रकार की दखलंदाजी नहीं कर सकती है और वह इस तरह के अपराधों को अपने मुकदमे में नहीं ला सकती है।

अगर एक व्यक्ति नौसेना में सैनिक है और वह युद्ध के दौरान ही अपनी सेना को छोड़ कर भाग जाता है तो उस पर नौसेना के द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत की सजा मिलेगी या फिर वह नौ सेना का सैनिक अपनी सेना के साथ किसी भी तरह की गद्दारी या विद्रोह करता है तो उस पर नौसेना के कानून के द्वारा ही सजा प्राप्त होगी।

इस पर इंडियन पेनल कोड की किसी भी प्रकार का सजा का प्रावधान नहीं होगा और इंडियन पीनल कोड इस तरह के अपराधों में दखलअंदाजी भी नहीं कर सकती है।

हर एक सेना का अलग-अलग कानून होता है वायु सेना का अलग कानून होता है, थल सेना का अलग कानून होता और जल सेना का अलग कानून होता है।

थल सेना का कोई भी सैनिक चाहे वह मेजर हो या उससे बड़े बैंक का सैनिक या किसी भी रैंक का सैनिक अगर सेना के साथ बेईमानी या सेना के साथ विद्रोह करता है तो थल सेना के कानूनों के तहत ही उसे सजा प्राप्त होगी अगर कोई भी सैनिक अपनी बटालियन को युद्ध में छोड़ कर भाग जाता है तो भी उसे आर्मी एक्ट के तहत ही सजा प्राप्त होगी।

आईपीसी की धारा 5 यह भी कहता है कि अगर किसी भी राज्य में किसी तरह का विशेष कानून बनाया गया है तो आईपीसी इस तरह के कानूनों में भी दखलंदाजी नहीं करेगी अगर किसी भी प्रकार का लोकल कानून या विशेष कानून है जिसके तहत किसी भी अपराध को लाया गया है तो आईपीसी इस तरह के कानूनों में प्रभावित नहीं करेगी विशेष कानूनों और लोकल कानून के अंतर्गत अपराधी को सजा मिलेगी।

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आईपीसी की धारा 5 एक्साम्पल के साथ आसान भाषा में

Local Law उस तरह के कानून को कहा गया है जो कि किसी विशेष इलाकों में ही Apply होती है यानी कि यह कानून कुछ सीमित इलाकों में ही लागू होती है और इस तरह के कानूनों में जो प्रावधान है उनको आईपीसी प्रभावित नहीं करती है।

जैसे कि Delhi rent Control Act और उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन अधिनियम कानून एक लोकल कानून है जो कि सिर्फ दिल्ली और उत्तर प्रदेश में ही लगती हैं इस तरह के कानूनों के प्रावधान को आईपीसी का कोई भी प्रावधान प्रभावित नहीं कर सकता है।

स्पेशल कानून पूरे देश में लागू होगा पर इस कानून को लागू करने का उद्देश्य किसी एक स्पेशल सब्जेक्ट पर होता है जैसे की passco act SC / ST act यह सब कानून विशेष कानून है यह पूरे देश पर लागू होते हैं पर इसका लागू होने का उद्देश्य है कि अगर आपने किसी भी दलित महिला के साथ दुराचार किया है या 16 साल की कम उम्र की महिला के साथ दुराचार किया है किसी भी महिला के साथ दुराचार किया है।

तो आपके ऊपर पोस्को एक्ट लगेगा और अगर आपने किसी भी दलित लोगों के साथ गलत व्यवहार किया है उनके साथ अत्याचार किया है तो आपके ऊपर एससी एसटी एक्ट लगेगा इन कानूनों में जो भी प्रावधान है उन पर आईपीसी की धारा का कोई भी प्रावधान प्रभावित नहीं करेगा।

एससी एसटी एक्ट के तहत यह कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति दलित समुदाय के लोगों के साथ अत्याचार करता है उनको प्रताड़ित करता है या उनके साथ भेदभाव करता है तो उस पर एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा होगा और उनका मुकदमा sc-st कोर्ट में चलाया जाएगा।

पोस्को एक्ट मैं लिखा गया है कि पोस्को एक्ट के मुकदमे को पास्को एक्ट में ही चलाया जाएगा इसके लिए अलग से किसी प्रकार के कोर्ट में नहीं जा सकते हैं चाहे आईपीसी और सीआरपीसी धारा में कुछ भी लिखा हो तो उसको एक्ट के तहत आने वाले अपराधों को पॉस्को कोर्ट में ही हल किया जाएगा ऐसे मुकदमे पॉस्को कोर्ट में ही चलेंगे।

अगर कोई भी कानून जोकि स्पेशल कानून और लोकल कानून के तहत लिखी गई है पर वह आईपीसी कानूनों के विरुद्ध है तो उस पर स्पेशल और लोकल कानून के तहत मुकदमा चलाया जाएगा यह जरूरी नहीं है कि इसे इंडियन पीनल कोड में बताया गया नहीं है अगर इसके खिलाफ स्पेशल कानून बनाया गया है आपको स्पेशल कानून के तहत ही मुकदमा चलाया जाएगा।

Conclusion 

इस आर्टिकल में हमने इंडियन पेनल कोड के आईपीसी की धारा 5 के बारे में विस्तार से जाना है इस आर्टिकल में मैंने आपको आईपीसी की धारा 5 से संबंधित बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारियों को बताया है जैसे कि आईपीसी धारा 5 क्या है। (What is IPC Section 5 in Hindi) आईपीसी की धारा 5 कौन सा प्रधान देता है इन सब के बारे में हमें विस्तार से जाना है।

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मुझे उम्मीद है कि आर्टिकल को पढ़कर आपको आईपीसी की धारा 5 के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त हुई होगी अगर आपको हमारा आर्टिकल पढ़कर अच्छा लगा तो हमारे आर्टिकल को शेयर जरूर करें और हमारे आर्टिकल के संबंधित कोई भी राय देना चाहता हैं तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

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