IPC Section 4 in Hindi – आईपीसी धारा 4 क्या है पूरी जानकारी

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दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आईपीसी धारा 4 क्या होती है। (What is IPC section 4 in Hindi), आईपीसी धारा 4 कैसे इसमें सजा सुनाई जाती है, आईपीसी धारा 4 में कैसे जमानत होती है। (How is punishment and bail in IPC section 4 in Hindi) यह धारा क्या कहती है। (What does IPC section 4 says in Hindi), सब कुछ विस्तार से जानेंगे इसलिए आप ये आर्टिकल लास्ट तक पढ़ते रहना।

कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है और विदेश में किसी प्रकार का अपराध करता है तो क्या उसे भारत में सजा मिलेगी ऐसे प्रश्न हमारे मन में होते हैं। बहुत से नागरिक ऐसी परेशानियों से भी जीते हैं उनके ऊपर अपराध करने वाले व्यक्ति देश छोड़कर कहीं चले जाते हैं तो क्या वह उन पर मुकदमा चला सकते हैं अगर कोई विदेशी व्यक्ति हमारे देश में कोई अपराध करता है तो उसे किस प्रकार की सजा मिलेगी।

आज इस आर्टिकल में हम ऐसे एक धारा के बारे में जानेंगे जिसके जरिए आप ऐसे अपराधों के मामलों में मुकदमा दर्ज करा सकते है। आज इस आर्टिकल में हम ipc 4 kya hai, ipc 4 में कौन-कौन से अपराधों के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाता है इन सब के बारे में हम इस आर्टिकल में बहुत ही विस्तार से जानेंगे यह कानून की धारा आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

IPC Section 4 in Hindi

आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा ध्यान से पढ़ें इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको इस आईपीसी की धारा को समझने में बहुत आसानी होगी क्योंकि इसमें हम IPC 4  को बहुत विस्तार से जानेंगे अगर आप भी आईपीसी धारा 4 को जानना चाहते हैं तो हमारे आर्टिकल को पूरा ध्यान से पढ़ें।

आईपीसी धारा 4 क्या होती है। (What is IPC Section 4 in Hindi)

हमें कानून की धाराओं की जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि हम अपने कार्य को कानूनी धाराओं के अंतर्गत ही कर सकें जिससे कि हमें कानूनी मसलों में पढ़ना ना पड़े और साथ ही साथ अगर हम किसी तरह की परेशानी में होते हैं और हमारे साथ किसी भी प्रकार का अपराध होता है तो हम उनके ऊपर मुकदमा दर्ज करा सकें कानूनी धाराओं की जानकारी होना इसलिए बहुत ही जरूरी है अब हम कानूनी धारा ipc 4 in Hindi में जानेंगे।

IPC section 4 kya hai कानून की धारा आईपीसी 4 ने उस तरह के अपराधों को रखा गया है जो कि किसी भारतीय नागरिक द्वारा अपराध विदेश में किया जाता है या किसी विदेशी नागरिक द्वारा अपराध भारत के सीमा में किया जाता है तब भारत के न्यायिक संस्थाओं को अधिकार है कि वह ऐसे लोगों पर मुकदमा चलाकर इन अपराधों की जांच करें।

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 1  IPC 4 sub section 1

इसके तहत कोई भारतीय नागरिक और वह विदेश में किसी तरह का अपराध करता है जिसको हमारे भारतीय दंड संहिता में भी उल्लेख किया गया है तो इस तरह के अपराध के मामलों पर हमारी भारतीय न्यायिक संस्था भी अपराध करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा चला सकती है।

एक भारतीय नागरिक विदेश में अपराध करता है तो उससे यह फर्क नहीं पड़ता कि यह अपराध उसने कहाँ किया है न्यायिक संस्थाएं उस पर मुकदमा चला सकती हैं भारत संस्थाओं को कानून में यह अधिकार प्राप्त है।

अगर कोई विदेशी नागरिक हमारे भारतीय सीमा में रहकर या फिर हमारे देश के किसी राज्य में किसी भी प्रकार का अपराध करता है तो हमारी कानून के द्वारा और न्याय संस्था के द्वारा उस व्यक्ति पर आपराधिक मामलों पर मुकदमा चलाई जा सकती है।

अगर कोई व्यक्ति जो भारतीय है और किसी दूसरे देश में रहता है और उसने कुछ ऐसा कार्य किया जो कि उस देश में अपराध में नहीं आता पर हमारे देश के कानून के तहत अपराध में आता है तो हमारे देश की न्यायिक संस्थाओं को अधिकार है कि वह उस व्यक्ति पर न्यायिक प्रक्रिया चलाएं।

 2  IPC 4 sub section 2

इस धारा के तहत यह कहा गया है कि अगर कोई भी हवाई जहाज या जल जहाज जो कि भारत में रजिस्टर है और भारत की संपत्ति में आता है तो उस पर किया गया अपराध भारतीय कानून के तहत चलाया जाएगा।

अगर कोई भारत के जहाज और हवाई जहाज विश्व के किसी भी कोने में हो और उस पर किसी व्यक्ति के द्वारा अपराध किया जा रहा है चाहे वह व्यक्ति भारतीय हो या भारतीय नागरिक ना हो उस पर भारतीय कानून के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

 Example:  एक मुकदमा MAYER  बनाम राज्य में एक जर्मन नागरिक जोकि यूरिक से मनीला जा रहा था उसकी फ्लाइट कनेक्टिंग फ्लाइट थी जो कि मुंबई से होते हुए मनीला जाने वाली थी यह हवाई जहाज एक swiss हवाई जहाज थी। इसमें मेयर जो कि सोना लेकर जा रहा था उसने मुंबई के ट्रांजिट फ्लाइट में उतर कर अपने सोने का ब्यौरा नहीं दिया जिसके कारण उस पर मुकदमा चलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के foreign exchange act 1947 के तहत कोई भी व्यक्ति जो कि भारत की सीमा से होते हुए जा रहा है और उसके पास सोना है तो उसे अपने पास सोने की ब्यौरा देना जरूरी है।

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इस केस में हमने देखा कि वह व्यक्ति एक जर्मन नागरिकता का था फिर भी उस पर भारतीय कानून के द्वारा मुकदमा चलाया गया क्योंकि उसने भारतीय कानून की अवहेलना की थी और वह भारतीय टेरिटरी से होते हुए सोना ले जा रहा था इसलिए भारतीय न्यायिक संस्थाओं का अधिकार है कि उस पर जांच करें।

IPC 4 धारा किन किन पर लागू होती है?

आईपीसी की धारा 4 भारतीय और भारत की सीमा में रहने वाले लोगों पर लागू होती है अगर कोई व्यक्ति विदेशी और वह भारत की सीमा के अंदर अपराध करता है तो विदेशी पर्यटकों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है और अगर कोई भारतीय व्यक्ति जो कि विदेश में रहता है और वह किसी प्रकार का अपराध करता है तो IPC 4 धारा के तहत उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

दूसरा अगर भारतीय हवाई जहाज और जल जहाज पर किसी भी प्रकार का अपराध होता है तो इस धारा के तहत अपराधी पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

प्रमुख मुकदमा

इस धारा के तहत कुछ प्रमुख मुकदमे हुए हैं किस धारा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है जैसे कि:-

sameeruddin बनाम assistant director of enforcement इस केस में केरला हाई कोर्ट ने एक पिटीशन पर कहा था कि जो भी अपराध भारत की सीमा के बाहर हुआ है उस पर भारतीय पुलिस यह उस राज्य के पुलिस छानबीन नहीं कर सकती है क्योंकि वह अपराध भारत की सीमा के बाहर हुआ है।

लेकिन मोहम्मद साजिद बनाम राज्य के केस में केरला हाई कोर्ट ने पूरी तरह से उल्टा आदेश दिया इसमें उन्होंने कहा कि किसी भारतीय नागरिक के द्वारा विदेश में अपराध होता है तो राज्य के पुलिस छानबीन कर सकती है बिना केंद्र सरकार की इजाजत लिए हुए। इसमें केंद्र सरकार की इजाजत लेना जरूरी नहीं है।

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Conclusion 

आज इस आर्टिकल में हमने कानून की धारा आईपीसी 4 के बारे में जाना है इस आर्टिकल में हमने इस धारा की हर एक जानकारी को बहुत ही विस्तार से जानने का कोसिस किया है मुझे उम्मीद है कि आईपीसी धारा 471 क्या है। (What is IPC Section 471 in Hindi) इस आर्टिकल को पढ़कर आपको आईपीसी 4 के बारे में अच्छी जानकारी मिली होगी।

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