आईपीसी धारा 374 क्या है | IPC section 374 in Hindi | सजा | जमानत

आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आईपीसी धारा 374 क्या है (what is IPC section 374 in Hindi), कैसे इसमें अपराध होता है, कितनी सजा होती है, (Punishment and Bail in IPC Section 374) यह अपराध जमानती है या नहीं है और अगर जमानती है तो जमानत कैसे होती है, एक वकील की जरूरत कब लगती है और इस अपराध को करने से कैसे बचा जा सकता है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 374 क्या कहती है (what does IPC section 374 says in Hindi), इस धारा से जुड़ी सारी जानकारी आपको बताने की कोशिश करेंगे।

ऐसा कई बार होता है कि कोई बड़ा व्यक्ति जिसके पास बहुत पैसे होते हैं या और किसी बड़े पद पर होता है तो अपने से छोटे किसी व्यक्ति से जबरदस्ती काम करवाता है और उस काम से पैसे भी नहीं देता है और उसकी क्षमता से अधिक काम करवाता है। किसी भी व्यक्ति से जबरदस्ती काम करवाना एक गंभीर अपराध माना जाता है। और यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से जबरदस्ती काम करवाता है और उस काम की कीमत भी नहीं चुकाता हैं तो ऐसे व्यक्ति को अपराधी माना जाता है।

IPC section 374 in Hindi

तो आज हम आपको ऐसे ही एक धारा के बारे में बताएंगे की कैसे किसी भी व्यक्ति से जबरदस्ती का काम करवाने पर क्या होता है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 374 (IPC section 374 in Hindi) से जुड़ी सारी जानकारी हम आपको इस आर्टिकल में बहुत विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अंत तक पढ़ना है। IPC Section 449

आईपीसी धारा 374 क्या है (What is IPC Section 374 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 374 के अनुसार जो कोई किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति की इच्छा के खिलाफ श्रम करने के लिये विधिविरुद्ध तौर पर विवश करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसको अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

आसान भाषा में समझाने की कोशिश करें तो यदि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से जबरदस्ती काम करवाने की कोशिश करता है तो इससे व्यक्ति पर धारा 374 लागू होती है और इस धारा के अंतर्गत उसे सजा सुनाई जाती है।

 Example:  अमन के पास बहुत पैसा होता है जिसके चलते उसके घर में हर तरह का काम करने के लिए उसमें अलग-अलग नौकर रखे हुए हैं जो उसका सारा काम करते हैं तो ऐसे में अमन उन पर जोर जबस्ती करता है उन्हें प्रताड़ित करता है उनसे डबल काम करवाता है और पैसे भी कम देता है। और यदि कोई काम करने से मना कर देता है तो उनसे जबरदस्ती काम करवाता है।

ऐसे में किसी दिन एक काम करने वाला व्यक्ति चुपके से जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कर देता है। जब पुलिस को अमन के बारे में शिकायत मिलती है तो वह तुरंत अमन को गिरफ्तार करने के लिए उसके घर आ जाते हैं और उसे गिरफ्तार कर लेते हैं। जब अमन को न्यायालय पेश किया जाता है तो उस पर धारा 374 लगा कर दंडित किया जाता है।।

भारतीय दंड संहिता की धारा 374 में सजा का प्रावधान (Punishment in IPC section 374 in Hindi)

भारतीय दण्ड दंड संहिता की धारा 374 के अनुसार यदी कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से जबरदस्ती काम करवाने की कोशिश करता है तो इससे व्यक्ति पर धारा 374 लागू होती है। इस धारा के अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति को एक वर्ष की कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दंडित किया जाता है। यह एक संज्ञेय अपराध है और समझौता करने योग्य नहीं है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

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भारतीय दंड संहिता की धारा 374 में जमानत का प्रावधान (Bail in IPC section 374 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 374 के अनुसार यदी कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से जबरदस्ती काम करवाने की कोशिश करता है तो इससे व्यक्ति पर धारा 374 लागू होती है। इस धारा के अन्तर्गत ऐसे व्यक्ति को एक वर्ष की कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दंडित किया जाता है।  यह एक जमानती अपराध है, इस अपराध में किसी भी अपराधी को आसानी से जमानत मिल जाती है।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं होता है और किस भी मजिस्ट्रेट द्वारा काफी विचार नहीं होता है। ऐसे में अपराधी अपनी जमानत की याचिका उच्च न्यायालय में पेश करता है तो उसकी जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया जाता है और जमानत मंजूर कर दी जाती हैं।

वकील की जरूरत कब लगती है।

भारतीय दंड संहिता के अनुसार यह एक जमानती अपराध है मगर किसी भी अपराधी को जमानत लेने के लिए एक वकील की जरूरत तो लगती ही है जो उसे जमानत दिलवा सकें। ऐसे अपराधों में आरोपी को निर्दोष करना काफी मुश्किल होता है तो उसे सिर्फ एक वकील ही बचा सकता है जो उसे निर्दोष साबित कर जमानत दिलवा सके। किसी भी केस को सुलझाने के लिए एक ऐसे वकील को नियुक्त करना चाहिए जो अपने क्षेत्र में निपुण हो और अपराधी को निर्दोष साबित कर उसे जमानत दिलवा ने में मददगार साबित हो सके।

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FAQ’s

Q1. भारतीय दंड संहिता की धारा 374 के अनुसार क्या अपराध है?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा374 के अनुसार यदी  कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से जबरदस्ती काम करवाता है तो यह धारा लागू होती है।

Q2. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 374 के मामले की सजा क्या है?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 374 के मामले में 1 वृष की कारावास और आर्थिक जुर्माना दोनो का प्रावधान है।

Q3. भारतीय दंड संहिता की धारा 374 जमानती अपराध है या गैर – जमानती अपराध?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 374 एक जमानती अपराध है।

Q4. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 374 में जमानत कैसे मंजूर की जाती है।

Ans. यह एक ज़मानती अपराध है तो ऐसे में यदि अपराधी उच्च न्यायालय में अपनी जमानत की याचिका दायर करता है तो उसकी जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया जाता है और जमानत मंजूर कर दी जाती हैं।

Q5. भारतीय दंड संहिता की धारा 374 संज्ञेय अपराध है या गैर – संज्ञेय अपराध?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 374  संज्ञेय अपराध है। IPC Section 402 in Hindi 

Conclusion

इस आर्टिकल में हमने बताया कि कैसे किसी से जबरदस्ती काम करवाने पर क्या होता है, कितनी सजा होती है, जमानत कैसे मंजूर की जाती है, कैसे एक वकील मददगार साबित हो सकता है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 374 (IPC section 374 in Hindi) से जुड़ी सारी जानकारी हमने आपको बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

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