IPC Section 234 in Hindi – आईपीसी की धारा 234 क्या है | सजा | जमानत

आज की इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारतीय दंड संहिता की धारा 234 क्या हैं (what is IPC section 234  in Hindi), आईपीसी की धारा 234 में कैसे अपराध होता है, कितनी सजा होती है, (Punishment and Bail in IPC Section 234) यह अपराध जमानती है या नहीं है और अगर जमानती है तो जमानत कैसे होती है, एक वकील की जरूरत कब लगती है और इस अपराध को करने से कैसे बचा जा सकता है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 234 क्या कहती है (what does IPC section 234 says in Hindi), इस धारा से जुड़ी सारी जानकारी आपको बताने की कोशिश करेंगे।

आजकल लोग पैसे कमाने के लिए असली चीजों जैसे नकली बनाकर बेचना शुरू कर देते हैं ताकि वे पैसे कमा सके। बाजार मैं ऐसी बहुत सी चीजें होती है जो असली नहीं होती जो नकली होती है जैसे कि नकली दवाइयां बनाना या नकली पैसे छाप ना या और भी कुछ और जो एकदम असली जैसे दिखते हैं मगर वह असल में नकली होते हैं। यानी की देखने में तो लगता है कि असली है मगर वह असली जैसे सिर्फ दिखते हैं असली नहीं होते हैं। अभी फिलहाल में कोरोना के समय में बहुत से लोगों ने इस महामारी का फायदा भी उठाया है जैसे नकली सैनिटाइजर बनाकर बेचना या नकली दवाइयां बनाकर बाजार में बेचना।

IPC Section 234 in Hindi

तो आज हम आपको ऐसे ही एक धारा के बारे में बताएंगे कि भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचने पर क्या होता है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 234 (IPC section 234 in Hindi) से जुड़ी सारी जानकारी हम आपको इस आर्टिकल में बहुत विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह आर्टिकल अंत तक पढ़ना है।

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आईपीसी की धारा 234 क्या है (What is IPC Section 234 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 234 के अनुसार जो कोई व्यक्ति किसी डाई या उपकरण को भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से या यह जानते हुए कि वह भारतीय सिक्के के कूटकरण में उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित है, बनाएगा या सुधारेगा या बनाने या सुधारने की प्रक्रिया के किसी भाग को करेगा अथवा खरीदेगा, बेचेगा तो ऐसे किसी व्यक्ति को किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी से दंडित किया जाएगा और जुर्माना लगा कर भी दण्डित किया जाएगा।

आसान भाषा में समझाने की कोशिश करें तो यदि कोई भी व्यक्ति भारतीय सिक्कों जैसे ही दिखने वाले नक़ली सिक्के बनाकर यदि वह बेचेगा खरीदेगा या बनाने की कोशिश करेगा यह जानते हुए कि ऐसा करना गैर कानूनी है, तो ऐसे किसी व्यक्ति पर धारा 234 लागू होगी और इसी धारा के अंतर्गत से दंडित भी किया जाएगा।

 Example:  कमलेश किसी दिन कोई नकली नोट लेकर बाजार जाता है और दुकानदार को दे कर सामान खरीद कर ले जाता है तो दुकानदार को कुछ पता नहीं चलता है कि नोट नकली है या असली है तो ऐसे में कमलेश को विश्वास हो जाता है कि किसी को पता नहीं चलता है कि नोट नकली है असली है तो ऐसे में वह घर आ जाता है और वह नकली नोट बनाना शुरू कर देता है। कमलेश किसी एक दिन दुकान जाता है और वहां पर नोट देता है तो दुकानदार देखता है कि नोट तो नकली है तो वह दुकानदार पुलिस को बुलाकर कमलेश के खिलाफ शिकायत दर्ज करा देता है।

पुलिस जब कमलेश के घर की छानबीन करती है तो उन्हें पता चलता है कि कमलेश नकली नोट छापता है तो ऐसे में पुलिस कमलेश को गिरफ्तार कर लेती है और उस पर धारा 234 लगाकर उसे दंडित किया जाता है।

आईपीसी की धारा 234 में सजा का प्रावधान (Punishment in IPC Section 234 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 234 के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति भारतीय सिक्कों जैसे ही दिखने वाले नक़ली सिक्के बनाकर यदि वह बेचेगा खरीदेगा या बनाने की कोशिश करेगा यह जानते हुए कि ऐसा करना गैर कानूनी है तो ऐसे किसी व्यक्ति को न्यायालय  7 वर्ष की कारावास की सजा और आर्थिक जुर्माना लगाकर दंडित किया जाता हैं।

यह एक संज्ञेय अपराध है और समझौता करने योग्य नहीं है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

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आईपीसी की धारा 234 में जमानत का प्रावधान (Bail in IPC Section 234 in Hindi)

भारतीय दंड संहिता की धारा 234 के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति भारतीय सिक्कों जैसे ही दिखने वाले नक़ली सिक्के बनाकर यदि वह बेचेगा खरीदेगा या बनाने की कोशिश करेगा यह जानते हुए कि ऐसा करना गैर कानूनी है तो ऐसे किसी व्यक्ति को न्यायालय 7 वर्ष की कारावास की सजा और आर्थिक जुर्माना लगाकर दंडित किया जाता हैं। यह एक गैर जमानती अपराध है, इस अपराध में किसी भी अपराधी को जमानत मिलना काफी मुश्किल होता है।

ऐसे कोई भी गैर कानूनी काम करना भारत में एक बड़ा अपराध माना जाता है। ऐसे में किसी भी अपराधी का बचना काफी मुश्किल होता है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं होता है और किस भी मजिस्ट्रेट द्वारा काफी विचारणीय होता है। ऐसे अपराध में किसी भी अपराधी को जमानत मिलने में काफी समय लग जाते हैं।

वकील की जरूरत कब लगती है।

भारतीय दंड संहिता के अनुसार कोई भी गैर कानूनी काम करना अपराध है, कोई भी असली चीज के जैसे नक़ली दिखने वाले सिक्कों का बनाना या उन्हें बेचने पर 7 वर्ष की कारावास की सजा से दंडित किया जाता है और यह अपराध एक गैर जमानती अपराध है जिसमें किसी भी अपराधी को जमानत मिलना काफी मुश्किल होता है तो किसी भी अपराधी को जमानत लेने के लिए एक वकील की जरूरत लगती है जो उसे आसानी से जमानत दिलवाने में मददगार साबित हो सके।

ऐसे में किसी भी अपराधी को जमानत वहीं वकील दिलवा सकता है जो अपने क्षेत्र में निपुण हो और सारे रास्ते जानता हो कि कैसे किसी अपराधी को निर्दोष साबित किया जा सकता है। ऐसा ही वकील अपराधी को जल्दी जमानत दिलवाने में मददगार साबित हो सकता है।

 Note:  इस अपराध से बचने का तरीका यह है कि कोई भी गैरकानूनी काम ना करें किसी भी असली चीज जैसे दिखने वाली नकली चीज का ना ही उपयोग करें और ना ही बनाएं इसमें आपका ही फायदा है।

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FAQ’s

Q1. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 234 क्या है?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 यह हैं कि यदि कोई  व्यक्ति भारतीय सिक्कों को नकली बना कर बेचता है या बनाने की कोशिश करता है तो ऐसे व्यक्ति पर धारा 234 लागू होती है।

Q2. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 में सजा का क्या प्रावधान है?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति भारतीय सिक्कों जैसे ही दिखने वाले नक़ली सिक्के बनाकर यदि वह बेचेगा खरीदेगा या बनाने की कोशिश करेगा यह जानते हुए कि ऐसा करना गैर कानूनी है तो ऐसे किसी व्यक्ति को न्यायालय 7 वर्ष की कारावास की सजा और आर्थिक जुर्माना लगाकर दंडित किया जाता हैं। 

Q3. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 में जमानत का क्या प्रावधान है?

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति भारतीय सिक्कों जैसे ही दिखने वाले नक़ली सिक्के बनाकर यदि वह बेचेगा खरीदेगा या बनाने की कोशिश करने पर यह धारा लागू होती है और यह एक गैर ज़मानती हैं।

Q4. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 में जमानत कैसे मंजूर की जाती हैं।

Ans. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 के अनुसार यह एक गैर ज़मानती अपराध है जिसके चलते इसमें जमानत मिलना काफ़ी मुश्किल होता है, तो इस अपराध में जमानत लेने के लिए एक अनुभवी वकील को नियुक्त करना पड़ता है। वहीं जमानत दिलवा सकता है।

Q5. भारतीय दंड संहिता की धारा 234 संज्ञेय अपराध है या गैर – संज्ञेय अपराध?

Ans. भारतीय दंड संहिता धारा 234 एक संज्ञेय अपराध है।

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Conclusion

इस आर्टिकल में हमने बताया कि कैसे कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेद करने पर क्या होता है, कितनी सजा होती है, जमानत मिलना कितना मुश्किल होता है और कैसे वकील मददगार साबित हो सकता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 234 (IPC ssection 234 in Hindi) से जुड़ी सारी जानकारी हमने आपको बहुत ही विस्तार और आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।

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